
मुंबई। रक्षा विशेषज्ञ और पूर्व सैन्य अधिकारी मारूफ रजा का 67 वर्ष की उम्र में कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद निधन हो गया। उनका गुरुवार को देहांत होने की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया।
अभिनेता अनुपम खेर, जो उनके घनिष्ठ मित्र थे, ने सोशल मीडिया एक्स पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने मारूफ की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि आखिरी मुलाकात में भी वे अपने गर्मजोशी भरे स्वभाव में थे। जिज्ञासु, तेज बुद्धि वाले और विचारों को बेबाकी से रखने वाले मारूफ ने कैंसर के खिलाफ गरिमापूर्ण संघर्ष किया।
अनुपम ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा पत्रकारिता का पथप्रदर्शक बताया। ‘टीवी पर उनकी बातें हमेशा ज्ञान, दृढ़ता और जिम्मेदारी से भरी होतीं। मुखर नहीं, लेकिन प्रभावी। उनकी कमी सबसे ज्यादा खलेगी, खासकर उनकी गर्मजोशी की,’ उन्होंने लिखा। परिवार के प्रति संवेदनाएं जताते हुए ओम शांति कहा।
अजमेर के मेयो कॉलेज के 1975 बैच के पूर्व स्कूल कप्तान मारूफ टीवी बहसों में आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों, भारत-पाक संबंधों और सीमा तनाव पर कड़ी राय रखते थे। दिल्ली के सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च, वाशिंगटन के हेनरी एल. स्टिमसन सेंटर और लंदन के किंग्स कॉलेज में विजिटिंग फेलोशिप उनके सम्मान को दर्शाती हैं।
मारूफ की अंतर्दृष्टि ने रक्षा विमर्श को नई दिशा दी। उनके योगदान की यादें हमेशा बनी रहेंगी।