
नई दिल्ली, 27 फरवरी। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल द्वादशी को मनाया जाने वाला नृसिंह द्वादशी भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार का विशेष पर्व है। इस दिन भक्तगण कठोर व्रत का पालन करते हुए शत्रु नाश, विपत्ति निवारण और सुख-समृद्धि की कामना के साथ पूजन करते हैं। शास्त्रों में इसे गोविंद द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है, जहां गोविंद जी की आराधना प्रधान होती है।
इस बार शनिवार को पड़ने वाली इस द्वादशी पर दुर्लभ त्रिपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है, जो पूजा-पाठ, दान-पुण्य और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी है। दृक पंचांग के अनुसार द्वादशी तिथि 27 फरवरी रात 10:32 बजे प्रारंभ होकर 28 फरवरी रात 8:43 बजे तक रहेगी।
शनिवार को सूर्योदय प्रातः 6:47 बजे तथा सूर्यास्त सायं 6:20 बजे होगा। नक्षत्र में पुनर्वसु प्रातः 9:35 बजे तक रहेगा, उसके बाद पुष्य नक्षत्र प्रारंभ होगा। योग में सौभाग्य संध्या 5:02 बजे तक तथा करण में बव प्रातः 9:36 बजे तक, फिर बालव करण रहेगा।
शुभ मुहूर्तों की सूची लंबी है- ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 5:08 से 5:58 बजे तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:11 से 12:57 बजे तक, विजय मुहूर्त 2:29 से 3:15 बजे तक, गोधूलि मुहूर्त 6:18 से 6:43 बजे तक तथा अमृत काल 7:18 से 8:49 बजे तक। विशेष रूप से त्रिपुष्कर योग प्रातः 6:47 से 9:35 बजे तक पूजा के लिए सर्वोत्तम है।
अशुभ काल से बचें- राहुकाल 9:41 से 11:07 बजे तक, यमगंड 2:00 से 3:27 बजे तक, गुलिक काल 6:47 से 8:14 बजे तक तथा दुर्मुहूर्त 6:47 से 7:34 बजे तक। इस शुभ संयोग का लाभ उठाकर भक्त नृसिंह भगवान की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।