
अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के भविष्य पर बड़ा असर पड़ सकता है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) कार्यक्रम की गहन समीक्षा शुरू कर दी है। यह एफ-1 वीजा धारकों को पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिकी कंपनियों में काम करने का मौका देता है, लेकिन अब इसके नियम सख्त हो सकते हैं।
सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने सीनेटर एरिक श्मिट को पत्र लिखकर बताया कि विभाग ओपीटी की अवधि और दायरे की जांच कर रहा है। क्या यह अमेरिकी श्रम बाजार, कर प्रणाली और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में है? क्या यह कांग्रेस की मूल मंशा से मेल खाता है? ये सवाल उठाए जा रहे हैं।
अमेरिका में 3 लाख से अधिक भारतीय छात्र हैं, जिनमें से कई ओपीटी पर निर्भर हैं। सामान्य कोर्स के लिए 12 महीने और स्टेम विषयों के लिए अतिरिक्त 24 महीने का काम मिलता है। नोएम ने स्वीकार किया कि कार्यक्रम में विदेशी छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे जोखिम उत्पन्न हुए हैं।
पत्र में कहा गया कि ओपीटी रेगुलेशनों पर आधारित है, न कि सीधे कानून पर। ट्रंप के अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत डीएचएस इसे पुनर्मूल्यांकन कर रहा है। इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट का स्टूडेंट प्रोग्राम इन कमजोरियों को दूर करने में जुटा है।
श्मिट ने पहले इसे नियमों का सहारा बताया था और पूर्ण जांच की मांग की थी। ट्रंप प्रशासन रोजगार-आधारित इमिग्रेशन की व्यापक समीक्षा कर रहा है, जिसमें भारत जैसे देशों के छात्र सबसे प्रभावित होंगे। यह कदम अमेरिकी मजदूरों को प्राथमिकता देने की दिशा में है।