
वॉशिंगटन में ईरान को लेकर अमेरिकी सियासत गरमाती जा रही है। सीनेट के बहुमत नेता जॉन थ्यून ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का खुला समर्थन किया है, जबकि हाउस के डेमोक्रेट किसी भी सैन्य कार्रवाई को संसदीय मंजूरी के बिना रोकने पर उतारू हैं।
फॉक्स न्यूज पर थ्यून ने कहा कि ट्रंप अमेरिकी सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि और नागरिकों के अवसरों के लिए कटिबद्ध हैं। उन्होंने ईरान के न्यूक्लियर खतरे पर चेतावनी दी, ‘हम परमाणु हथियारों वाले ईरान को बर्दाश्त नहीं कर सकते।’ थ्यून ने ट्रंप के ‘शक्ति से शांति’ सिद्धांत की तारीफ की, जो जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की तैयारी रखता है, लेकिन वार्ता की उम्मीद भी जताई।
उधर, हाउस डेमोक्रेट्स ने खन्ना-मासी प्रस्ताव पर पूर्ण मतदान की घोषणा की। उनका कहना है कि बिना कांग्रेस की सहमति सैन्य कदम असंवैधानिक होंगे। हर सदस्य को अपनी राय दर्ज करने का मौका मिलेगा।
सीनेट में चक शूमर ने प्रशासन से ईरान लक्ष्यों पर स्पष्टता मांगी। जिनेवा वार्ताओं के बीच उन्होंने रणनीति और पारदर्शिता की जरूरत बताई।
इसी कड़ी में सीनेटर जैकी रोसेन और डेव मैककॉर्मिक ने ईरान के इंटरनेट ब्लैकआउट और विरोध दमन पर बिल पेश किया। रोसेन ने कहा, ईरान के लोग दमनकारी शासन से मुक्ति पाएं। मैककॉर्मिक ने इसे नैतिक समर्थन बताया।
यह विवाद अमेरिकी विदेश नीति की गहरी दरारें उजागर कर रहा है। आने वाले दिनों में कांग्रेस के फैसले ईरान के साथ रुख तय करेंगे।