
इमली का खट्टा-मीठा स्वाद न केवल भोजन को लजीज बनाता है, बल्कि यह स्वास्थ्य का अनमोल रत्न भी है। पाचन तंत्र को बलशाली बनाने और वजन पर अंकुश लगाने में यह बेहद प्रभावी सिद्ध होती है। बिहार के पर्यावरण विभाग द्वारा सराही गई यह प्रकृति की देन जंगलों, खेतों और सड़क किनारों पर आसानी से मिल जाती है।
इसके झुकी शाखाओं और खुरदुरी छाल वाले विशाल वृक्ष की पहचान सहज है। गूदा चटनी, सांभर जैसे व्यंजनों का अभिन्न अंग है, जो हर थाली को स्वादिष्टता प्रदान करता है।
एंटीऑक्सीडेंट्स से परिपूर्ण इमली सूजन घटाती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। मैग्नीशियम, कैल्शियम, फाइबर व विटामिन सी की प्रचुरता इसे पाचन विशेषज्ञ बनाती है। कब्ज दूर कर लैक्सेटिव गुणों से आंतों को स्वच्छ रखती है।
कोलेस्ट्रॉल संतुलित कर हृदय को स्वस्थ बनाए रखती है। पॉलीफेनॉल्स लीवर की रक्षा करते हैं, फ्लेवोनॉइड्स जलन कम करते हैं। रक्त शर्करा नियंत्रण और वजन प्रबंधन में सहायक।
पत्तियां, छाल, बीज एंटी-बैक्टीरियल गुणों से लैस हैं। नियमित सेवन से लाभ, किंतु संयम जरूरी। अधिकता से दस्त या पीड़ा संभव। मधुमेह रोगी, गर्भवती, नर्सिंग महिलाएं चिकित्सक सलाह लें। अम्लीयता से दांत सुरक्षित रखें, एलर्जी सावधानी बरतें। इमली को जीवनशैली में अपनाकर स्वस्थ रहें।