
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कोयंबटूर के ईशा योग केंद्र में बने आधुनिक गैसीफायर श्मशान घाटों की जमकर सराहना की है। 26 फरवरी को हुई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश ने इसे ‘पवित्र कार्य’ करार देते हुए पक्षकारों को आपसी सहमति से विवाद निपटाने का सुझाव दिया।
मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा पहले खारिज याचिका के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने अपनी जमीन का हिस्सा ईशा को बेच दिया था। शेष सटी हुई भूमि पर बातचीत से समाधान संभव है।
न्यायालय के निर्देश पर दोनों पक्ष सहमत हो गए और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राजेंद्रन को मध्यस्थ नियुक्त किया गया। मद्रास हाईकोर्ट ने पहले ही पंचायत अनुमति और प्रदूषण नियमों का पालन होने की पुष्टि की थी।
ईशा फाउंडेशन ने आसपास के पांच से अधिक गांवों की मांग पर तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मंजूरी लेकर यह सुविधा बनाई। 2010 से संस्था तमिलनाडु में 30 श्मशान घाट चला रही है, जो पर्यावरण अनुकूल हैं।
पिछले साल दिसंबर में राज्य सरकार के साथ मिलकर बीपीएल परिवारों के लिए निःशुल्क श्मशान सेवाएं शुरू की गईं। यह कदम आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सम्मानजनक अंतिम संस्कार की सुविधा प्रदान करता है।