
मुंबई। भारतीय रेलवे में नवाचार की नई लहर लाने के लिए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ’52 सप्ताह में 52 सुधार’ अभियान के तहत रेल टेक नीति और रेल दावा ट्रिब्यूनल (आरसीटी) के पूर्ण डिजिटलीकरण की घोषणा की। यह तीसरा और चौथा सुधार रेलवे को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
रेल टेक नीति का मुख्य लक्ष्य स्टार्टअप्स, उद्योगों, संस्थानों और व्यक्तिगत इनोवेटर्स को जोड़ना है। इसके लिए एक विशेष ‘रेल टेक पोर्टल’ शुरू किया जा रहा है, जो चयन प्रक्रिया को सरल बनाएगा। पोर्टल पर उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफेस के साथ विस्तार अनुदान तीन गुना और प्रोटोटाइप विकास के लिए अधिकतम अनुदान दोगुना कर दिया गया है।
नीति में प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया गया है, जैसे एआई आधारित हाथी घुसपैठ अलर्ट सिस्टम, कोचों में आग का पता लगाने वाली प्रणाली, ड्रोन से टूटे रेल का पता, रेल तनाव निगरानी, पार्सल वैन पर लोड सेंसर, सौर पैनल युक्त कोच, कोच सफाई की एआई निगरानी, कोहरे में बाधा पहचान और पेंशन विवादों के लिए एआई समाधान।
मंत्री वैष्णव ने कहा कि यह नीति रेलवे में तकनीक के व्यवस्थित समावेश को सुनिश्चित करेगी। स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को डिजिटल पोर्टल के जरिए आसानी से जुड़ने का मौका मिलेगा। पुरानी जटिल प्रक्रियाओं को छोड़कर अब नवाचार पर आधारित सरल संरचना बनेगी।
चौथे सुधार में ई-आरसीटी सिस्टम दावों को दर्ज करने से लेकर निपटारे तक की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और देशव्यापी बनाएगा। एआई से सशक्त यह कदम यात्रियों को नई सुविधा प्रदान करेगा।