
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति का पुनर्गठन किया है, जिसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को अध्यक्ष पद सौंपा गया है। यह नियुक्ति आधिकारिक कार्यों में हिंदी के बढ़ते उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को इसकी पुष्टि की।
राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल को उपाध्यक्ष बनाया गया है। समिति के पुनर्गठन संबंधी अधिसूचना भारत के राजपत्र में प्रकाशित हो चुकी है। नई समिति में संसदीय सदस्यों की मजबूत उपस्थिति है, जिसमें कुल छह सांसद शामिल हैं।
संसदीय कार्य मंत्रालय ने चार सदस्य नामित किए: लोकसभा सांसद मनोज तिग्गा (अलीपुरद्वार, पश्चिम बंगाल), शशांक मणि (देवरिया, उत्तर प्रदेश), राज्यसभा सांसद एस. फांगनोन कोन्याक (नागालैंड) और संजय झा (बिहार)। राजभाषा संसदीय समिति ने लोकसभा के माला राज्य लक्ष्मी शाह (टिहरी गढ़वाल) और सतपाल ब्रह्मचारी (सोनीपत) को चुना।
समिति में मंत्रालय के चार नामित सदस्य, गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग से तीन, विश्व हिंदी परिषद और हैदराबाद की हिंदी प्रचार सभा से एक-एक प्रतिनिधि हैं। कुल मिलाकर एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष, 15 मनोनीत और 37 पदेन सदस्य हैं, जिनमें उर्वरक, रसायन-पेट्रोकेमिकल्स तथा फार्मास्यूटिकल्स विभागों के सचिव शामिल हैं।
उर्वरक विभाग का एक अतिरिक्त या संयुक्त सचिव सदस्य-सचिव का दायित्व निभाएंगे। समिति का प्रमुख उद्देश्य मंत्रालय के प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के प्रगतिशील प्रयोग की समीक्षा और सुझाव देना है। संवैधानिक प्रावधानों, केंद्रीय हिंदी समिति के निर्णयों, राजभाषा अधिनियम तथा गृह मंत्रालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना भी इसका दायित्व है।
समिति का कार्यकाल गठन से तीन वर्ष का है, जिसे विशेष मामलों में बढ़ाया जा सकता है। सांसदों की सदस्यता उनके कार्यकाल तक और पदेन सदस्यों की उनके पद तक रहेगी। रिक्ति पर प्रतिस्थापन शेष अवधि के लिए ही होगा। मुख्यालय दिल्ली में होने के बावजूद बैठकें देशभर में हो सकेंगी। यह कदम हिंदी को प्रशासन की मुख्यधारा में लाने की दृढ़ प्रतिबद्धता दर्शाता है।