
ईवाई की नई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की अर्थव्यवस्था 6.8 से 7.2 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है। प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने वाले आर्थिक सुधारों से यह संभव होगा।
ईवाई इंडिया के चीफ पॉलिसी एडवाइजर डीके श्रीवास्तव ने बताया कि ये समझौते देश की मध्यम अवधि की विकास क्षमता को मजबूत कर रहे हैं। सरकार का ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य कर-से-जीडीपी अनुपात में लगातार सुधार पर निर्भर करता है, जो मुख्य रूप से अनुपालन मजबूती से आएगा।
इस वर्ष व्यक्तिगत आयकर और जीएसटी में सुधार परिवारों की खर्च करने की क्षमता बढ़ाने के लिए किए गए, जिससे निजी खपत को बल मिला। हालांकि, इससे सरकारी आय पर असर पड़ा है और वित्त वर्ष 2026 के अनुमानों से कम रह सकती है।
फिर भी, राजकोषीय घाटे का 4.3 प्रतिशत का लक्ष्य पूरा होने की पूरी संभावना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के लिए यह लक्ष्य रखा है। बजट भाषण में उन्होंने 2025-26 में 4.4 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल करने का जिक्र किया।
सरकार 11.7 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध बाजार उधारी लेगी। यह रणनीति आर्थिक गति और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखेगी। भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूत कदम उठा रहा है।