
पटना। बिहार विधानमंडल का बजट सत्र शुक्रवार को समाप्त हो रहा है, लेकिन शराबबंदी कानून को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर हैं। विपक्षी आरजेडी के नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए कानून को मजाक करार दिया है।
आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों से कहा कि बिहार में शराब की होम डिलीवरी आम हो गई है। बॉर्डर पर इतनी सुरक्षा के बावजूद खेप कैसे आ रही है? उन्होंने एनडीए के बड़े नेताओं के संरक्षण का आरोप लगाया और बताया कि बंदी से पहले जितनी शराब बिकती नहीं थी, उससे कहीं ज्यादा अब बिक रही है।
इससे पहले आरजेडी एमएलसी सुनील कुमार ने बुधवार को खुली चुनौती दी थी कि वे सत्र के आखिरी दिन विधानमंडल परिसर में ही शराब डिलीवरी करा देंगे। लालू यादव के करीबी सुनील ने दावा किया कि 2016 के बाद शराब की खपत कई गुना बढ़ गई है और अब युवा ‘सूखे नशे’ का शिकार हो रहे हैं।
जदयू के एमएलसी नीरज कुमार ने पलटवार किया। उन्होंने 27 फरवरी को गिरफ्तारी का भरोसा दिलाया। राजद पर शराब कंपनियों से 46 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड का चंदा लेने का तंज कसते हुए कहा कि जो खाएगा, वही गाएगा।
शराबबंदी बिहार की राजनीति का केंद्रबिंदु बनी हुई है। सीमाओं से तस्करी, भ्रष्टाचार के आरोप और युवाओं पर असर जैसे मुद्दे उभर रहे हैं। सत्र समाप्ति के बाद भी यह बहस जारी रहेगी।