
अमेरिका में एक अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिल रहा है। महामंदी के बाद पहली बार इतने बड़े पैमाने पर अमेरिकी नागरिक देश छोड़कर जा रहे हैं। विशेषज्ञ इसे ‘डोनाल्ड डैश’ नाम दे रहे हैं, जो राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में तेज हुआ है।
ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल 1.5 लाख लोगों का शुद्ध पलायन हुआ, जो 2026 में और बढ़ सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के विश्लेषण से पता चलता है कि 2025 में अमेरिका में आने वाले प्रवासियों की संख्या 26-27 लाख रह गई, जबकि 2023 में यह 60 लाख थी। कम से कम 1.8 लाख अमेरिकी 15 देशों में बस गए।
राज्य विभाग के अनुसार, मेक्सिको में 16 लाख, कनाडा में 2.5 लाख से अधिक और ब्रिटेन में 3.25 लाख अमेरिकी रहते हैं। पुर्तगाल में कोविड के बाद 500 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। आयरलैंड ने 2025 में 10,000 अमेरिकियों को स्वागत दिया।
रिलोकेशन कंपनियों में मांग चरम पर है। एक्सपैट्सी की जेन बार्नेट कहती हैं, ‘अब आम लोग भी जा रहे हैं।’ उनका लक्ष्य 10 लाख अमेरिकियों को बसाना है। कारण: रिमोट वर्क, महंगे रहन-सहन और जीवनशैली।
व्हाइट हाउस का दावा है कि अर्थव्यवस्था मजबूत है और अवैध प्रवासियों को निष्कासित किया जा रहा है। नागरिकता त्याग के आवेदन 48 प्रतिशत बढ़े। क्रिस फोर्ड जैसे लोग यूरोप की गुणवत्ता पसंद कर रहे हैं। स्पेन में वाइन के बाद कई रुक जाते हैं।
शिक्षा में भी बदलाव: अमेरिका में विदेशी छात्र 17 प्रतिशत कम। ब्रिटेन और आयरलैंड में अमेरिकी आवेदन बढ़े। 1935 की तरह इतिहास दोहरा रहा है।