
नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को सोशल मीडिया कंपनियों से कंटेंट क्रिएटर्स के साथ राजस्व का निष्पक्ष बंटवारा करने की मांग की। पत्रकारों से लेकर पारंपरिक मीडिया, इन्फ्लुएंसर, दूरस्थ क्षेत्रों के क्रिएटर्स, प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं तक सभी को डिजिटल प्लेटफॉर्म से होने वाली कमाई में उचित हिस्सा मिलना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि ये क्रिएटर्स ही डिजिटल दुनिया को जीवंत बनाते हैं। चाहे समाचार विशेषज्ञ हों या गांवों में रहने वाले वीडियो मेकर, सभी प्लेटफॉर्म की सफलता के आधार हैं। इसलिए कमाई के बंटवारे में पूर्ण पारदर्शिता जरूरी है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पूरे डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में निष्पक्षता का सिद्धांत अपनाया जाए। प्लेटफॉर्म्स को क्रिएटर्स के योगदान से भारी लाभ होता है, ऐसे में उनका हक छीनना उचित नहीं।
यह बयान तब आया जब सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती बढ़ा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने आईटी नियम 2021 में संशोधन का मसौदा पेश किया है, जो डीपफेक और एआई जनित भ्रामक कंटेंट पर अंकुश लगाएगा।
मसौदे के तहत कृत्रिम कंटेंट को स्पष्ट लेबल करना अनिवार्य होगा, जिसमें स्थायी मेटाडेटा जोड़ा जाएगा। 50 लाख से अधिक यूजर्स वाले प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, यूट्यूब को एआई कंटेंट चिह्नित करना होगा।
वीडियो-फोटो में 10 प्रतिशत हिस्सा चिह्न के लिए, ऑडियो में पहले 10 प्रतिशत में। मेटाडेटा में छेड़छाड़ नहीं हो सकेगी। उल्लंघन पर आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।
वैष्णव का यह आह्वान भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे क्रिएटर्स प्रोत्साहित होंगे और प्लेटफॉर्म जिम्मेदार बनेंगे।