
तेल अवीव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बीच आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम पर ऐतिहासिक समझौता होने जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद यह कदम भारत की सुरक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई देगा, जहां स्वदेशी हथियारों ने पाकिस्तान और पीओके के नौ आतंकी अड्डों को ध्वस्त कर दुश्मनों के हमलों को विफल कर दिया था। ब्रह्मोस, हैमर बम, राफेल, सुखोई और मिराज जैसे प्लेटफॉर्म्स ने अपनी ताकत साबित की।
दोनों नेता सबसे पहले यद वाशेम स्मारक जाएंगे, फिर किंग डेविड होटल में द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। चर्चा का केंद्र रक्षा, विज्ञान-तकनीक, व्यापार और जन-से-जन संपर्कों में सहयोग होगा। क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा।
आर्थिक, सुरक्षा व कूटनीतिक क्षेत्रों में कई एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे, उसके बाद संयुक्त प्रेस बयान जारी किया जाएगा। आयरन डोम अब सीधी खरीद नहीं, बल्कि ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ या प्रोजेक्ट कुशा का हिस्सा बनेगा। इजरायल ने मेक इन इंडिया के तहत तकनीक हस्तांतरण का प्रस्ताव दिया है, जिससे भारत में ही रॉकेट, मोर्टार व ड्रोनरोधी सिस्टम बने सकेंगे।
इसके साथ आयरन बीम लेजर सिस्टम में भी रुचि है, जो सस्ता व त्वरित हवाई खतरों का सामना करेगा। एस-400 का पूरक बनकर यह 2030 तक अभेद्य कवच तैयार करेगा। पाकिस्तान के लिए यह झटका है, क्योंकि उनकी रणनीति कमजोर पड़ जाएगी। भारत-इजरायल साझेदारी अब क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदलेगी।