
गर्मियों का मौसम आते ही ठंडे पेय की चाहत बढ़ जाती है। छाछ इस मौसम का लोकप्रिय पेय है, जो न केवल ताजगी देता है बल्कि आयुर्वेद में त्रिदोष संतुलन का प्रमुख साधन माना जाता है। वात, पित्त और कफ प्रवृत्ति वाले लोगों के लिए इसके सेवन के नियम अलग-अलग हैं।
आयुर्वेदिक ग्रंथों में छाछ को पाचन अग्नि को प्रज्वलित करने वाला बताया गया है। सही मात्रा और सामग्री के साथ सेवन से यह शरीर की कमियों को दूर कर औषधि का रूप धारण कर लेती है।
वात प्रकृति के व्यक्तियों को ठंडी छाछ में सेंधा नमक मिलाकर पीना चाहिए। इससे पेट फूलना, गैस या तत्काल शौच की समस्या नहीं होती। पाचन सुचारू रहता है और शरीर हल्का महसूस होता है।
पित्त प्रधान लोगों के लिए मिश्री युक्त छाछ उत्तम है। यह शरीर की तापमान कम करती है, अम्लता घटाती है और पेट की जलन से राहत दिलाती है। भोजन सही ढंग से पचता है।
कफ प्रकृति वालों को सोंठ पाउडर डालकर पीनी चाहिए। इससे बलगम नहीं जमता, गला साफ रहता है और नाक बंद नहीं होती। पाचन शक्ति मजबूत बनी रहती है।
आयुर्वेद सलाह देता है कि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। अपनी प्रवृत्ति पहचानें और छाछ को उसी अनुसार अपनाएं। इससे गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य संतुलित रहेगा।