
यरूशलम में 25 फरवरी को एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल की संसद नेसेट को संबोधित किया। वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने जिन्होंने इस मंच पर अपनी बात रखी। अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान इस स्वागतपूर्ण अवसर ने दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को नई ऊंचाई प्रदान की।
नेसेट स्पीकर अमीर ओहाना ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें विशेष पदक से सम्मानित किया। मोदी के भाषण से ठीक पहले इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू, विपक्ष नेता यायर लापिड तथा स्पीकर ओहाना ने बोलते हुए भारत-इजरायल संबंधों के प्रति द्विपक्षीय एकजुटता जताई।
अपने संबोधन की शुरुआत में पीएम ने स्पीकर को धन्यवाद दिया तथा पदक को दोनों राष्ट्रों की अनंत मित्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों को समर्पित किया। उन्होंने प्राचीन सांस्कृतिक जुड़ाव के साथ-साथ प्रौद्योगिकी, रक्षा, सुरक्षा तथा नवाचार में समकालीन साझेदारी पर प्रकाश डाला।
कृषि, जल संरक्षण, ग्रामीण उन्नयन तथा स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्रों में जन-जन के संबंधों ने रिश्तों को गति दी है। पीएम ने इजरायल में भारतीयों तथा भारत में यहूदियों के योगदान को सराहा।
आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता नीति का जिक्र करते हुए 7 अक्टूबर हमले पर संवेदना व्यक्त की तथा क्षेत्रीय शांति के हर प्रयास में भारत का साथ देने का वादा किया। संयुक्त राष्ट्र के गाजा प्रस्ताव का समर्थन दोहराया।
आईएमईसी तथा आई2यू2 जैसे मंचों पर गहन सहयोग का आह्वान किया। भारत की प्रगति यात्रा बताते हुए व्यापार, हरित ऊर्जा, डिजिटल क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर बल दिया। द्विपक्षीय निवेश संधि पर प्रसन्नता जताते हुए मुक्त व्यापार समझौते का शीघ्र निपटारा मांगा।
संसदीय मैत्री समूहों के जरिए संवाद बढ़ाने का सुझाव दिया। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ और ‘टिक्कुन ओलम’ के साम्य पर चर्चा की। नेसेट सदस्यों का आभार माना तथा पुरिम पर्व की बधाई दी।