
देश भर में बोगनवेलिया के रंग-बिरंगे फूल घरों, बगीचों और सड़कों को सजाते हैं। नारंगी, गुलाबी, लाल और सफेद रंगों की यह झलक आंखों को भाने वाली है, लेकिन इसकी असली ताकत इसके औषधीय गुणों में छिपी है। आयुर्वेद में इसे विशेष महत्व प्राप्त है।
बिहार पर्यावरण एवं वन विभाग के मुताबिक, यह पौधा सजावट से कहीं आगे है। इसके फूल, पत्तियां, तना और जड़ें सभी पारंपरिक चिकित्सा में उपयोगी हैं। दक्षिण अमेरिका मूल का यह पौधा नायटेजिनेसी परिवार से है और भारत सहित विश्व स्तर पर लोकप्रिय है।
फूलों में सूजन रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। इनका काढ़ा बनाकर पीने से खांसी, जुकाम और गले की खराश में तुरंत राहत मिलती है। पत्तियों का रस पाचन सुधारता है, कब्ज भागाता है और पेट के दर्द को शांत करता है।
तने और छाल का काढ़ा ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मददगार है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में बुखार, सूजन और त्वचा रोगों के इलाज के लिए भी इसका उल्लेख है।
सूखे में भी खिलने वाला यह पौधा कम पानी और न्यूनतम देखभाल मांगता है। धूप पसंद करने के कारण यह आसानी से उगाया जा सकता है। प्राकृतिक चिकित्सा के इस खजाने को अपनाएं और स्वास्थ्य लाभ उठाएं।