
नई दिल्ली। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी न्यायिक राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में निचली अदालत की कार्रवाई पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने ईडी को नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्य कांत ने ईडी के वकील से कहा कि आपके पास कई बड़े-बड़े केस पेंडिंग हैं। उन पर ध्यान केंद्रित कीजिए और अपनी ऊर्जा वहीं लगाइए, ताकि बेहतर परिणाम हासिल हो सकें। यह टिप्पणी हल्के लहजे में कही गई, लेकिन इसका संदेश गहरा था। ईडी ने दावा किया कि सोरेन को सात बार समन भेजे गए, लेकिन वे हाजिर नहीं हुए।
वहीं, सोरेन के वकील मुकुल रोहतगी ने पलटवार किया कि उनके मुवक्किल तीन बार पेश हुए, लेकिन हर बार गिरफ्तार कर लिए गए। मामला 8.86 एकड़ जमीन के दस्तावेजों से जुड़ा है, जो ईडी ने सोरेन के एक सहयोगी के पास से बरामद किए थे। इसके बाद पीएमएलए के तहत केस दर्ज हुआ।
रांची की अदालत ने आईपीसी की धारा 174 के तहत समन जारी किया था, जिसे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। हेमंत सोरेन पहले इस मामले में गिरफ्तार भी हो चुके हैं। अब ईडी को अपना जवाब दाखिल करना होगा। यह आदेश न केवल सोरेन को तत्काल राहत देता है, बल्कि जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है।
झारखंड की राजनीति में यह विकास महत्वपूर्ण है, जहां केंद्र और राज्य के बीच तनाव लंबे समय से चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की दिशा में सकारात्मक कदम है।