
1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान जब देश सदमे में था, तब मात्र दस वर्षीय पंकज उधास ने स्टेज पर ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गीत गाकर सबके दिल जीत लिए। लता मंगेशकर का यह देशभक्ति गाना उस समय हर भारतीय के होठों पर था। पंकज की मासूम आवाज सुनकर दर्शक भाव-विभोर हो गए और एक श्रोता ने खुशी में उन्हें 51 रुपये भेंट कर दिए। यह छोटा-सा उपहार उनके संगीत सफर का आधार बना।
गुजरात के जेतपुर में 17 मई 1951 को जन्मे पंकज का परिवार संगीत से ओतप्रोत था। पिता केशुभाई सरकारी नौकरी में थे, लेकिन संगीत प्रेमी। मां जीतूबेन गायन शौकीन, बड़े भाई मनहर व नर्मल पहले से गायक। ऐसे माहौल में पंकज ने बचपन से ही राग-रंग सीखे।
शिक्षा में भी अव्वल रहे—मुंबई से बीएससी। संगीत प्रशिक्षण राजकोट अकादमी से तबला, फिर उस्ताद गुलाम कादिर खान से शास्त्रीय गायकी। मुंबई में नवरंग नागपुरकर के सान्निध्य में निखरे। फिल्म ‘कामना’ (1972) से शुरुआत हुई, जो असफल रही। विदेश यात्रा के बाद ‘नाम’ फिल्म का ‘चिट्ठी आई है’ (1986) सुपरहिट।
गजल एल्बमों ने असली पहचान दी—’आहट’, ‘मुकद्दर’, ‘तरन्नुम’, ‘महफिलें’, ‘आफरीन’। प्रेम और जज्बातों का अनोखा संगम। पद्मश्री (2006), पद्मभूषण (2025) से सम्मानित। 26 फरवरी 2024 को मुंबई में 72 वर्ष की आयु में निधन। उनकी गजलें अमर हैं।