
नई दिल्ली। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि स्पष्ट नीतियों और उद्योग की सक्रिय भागीदारी से भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के निर्माण और नवाचार में विश्व का प्रमुख केंद्र बन सकता है। एफआईसीसीआई इलेक्ट्रिक वाहन राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण को मजबूत करने पर जोर दिया।
मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए सर्वोत्तम उपाय अपनाए जाएंगे। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के केंद्र में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को स्थापित कर हम घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देंगे, स्थानीयकरण को प्रोत्साहित करेंगे और भारत को ईवी, बैटरी व महत्वपूर्ण पार्ट्स का वैश्विक हब बनाएंगे।
पिछले दस वर्षों में ऑटो कंपोनेंट्स निर्यात दोगुना होकर 16.9 अरब डॉलर पहुंच गया है। यह भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने अनुमान लगाया कि वैश्विक ईवी बाजार अगले दशक में ट्रिलियन डॉलर का होगा। उन्होंने भारत को विश्वसनीय निर्माण केंद्र बनाने की वकालत की। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जलवायु के साथ-साथ आर्थिक व रणनीतिक अवसर है।
एफआईसीसीआई ग्रीन मोबिलिटी समिति के सह-अध्यक्ष विक्रम हांडा ने ‘ग्रीन मोबिलिटी 2.0’ की बात की। महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण से लेकर बैटरी निर्माण, वाहन उत्पादन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तक का पूरा चेन भारत ने तैयार किया है। यह उद्योग की दिशा और भविष्य की संभावनाओं को दिखाता है।
भारत की यह प्रगति न केवल रोजगार सृजित करेगी बल्कि वैश्विक नेतृत्व भी सुनिश्चित करेगी।