
अफ्रीका की नदियों का यह विशालकाय शाकाहारी दरियाई घोड़ा प्रकृति का चमत्कार है। 3200 किलोग्राम तक वजन के बावजूद यह घास ही खाता है और पानी में डूबे रहकर सांस ले लेता है। बिहार के संजय गांधी जैविक उद्यान में यह पर्यटकों को मंत्रमुग्ध करता है।
वैज्ञानिक रूप से सूअरों का दूर का रिश्तेदार, यह 14 फुट लंबा और 5 फुट ऊंचा होता है। सिर के ऊपरी भाग पर आंखें, कान व नाक होने से जलमग्न अवस्था में भी जागरूक रहता है। गहराई में उतरते ही ये अंग स्वतः बंद हो जाते हैं।
शाम ढलते ही यह जल से बाहर निकलकर 50 किलोग्राम से अधिक घास चरता है और सूर्योदय से पूर्व लौट आता है। 48 किमी/घंटा रफ्तार पकड़ सकता है। सख्त चमड़ी गुलाबी तेल छोड़ती है जो सुरक्षा प्रदान करती है।
खतरे बरकरार हैं—आवास ह्रास, शिकार, सूखा। आईयूसीएन में सामान्य घोड़ा सुभेद्य, छोटा लुप्तप्राय। नदियों को साफ रखकर मछलियों के लिए स्थान बनाते हैं ये। संरक्षण आवश्यक है इकोसिस्टम के लिए।