
ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य ब्लैक होल हैं, जो अपनी अपार गुरुत्वाकर्षण शक्ति से प्रकाश तक को कैद कर लेते हैं। ये कोई साधारण छेद नहीं, बल्कि इतने सघन द्रव्यमान वाले क्षेत्र हैं जहां स्पेस-टाइम बुरी तरह मुड़ जाता है। नासा के अनुसार, इनके केंद्र में सिंगुलैरिटी होती है, जिसे इवेंट होराइजन घेरती है—इसके अंदर प्रवेश करने वाला कुछ भी बाहर नहीं लौट सकता।
ब्लैक होल के आसपास एक्रीशन डिस्क घूमती है, जिसमें गैस और धूल गर्म होकर एक्स-रे उत्सर्जित करती है। यही वैज्ञानिकों को इनके बारे में जानकारी देती है। ग्रेविटेशनल लेंसिंग एक आश्चर्यजनक प्रभाव है, जिसमें ब्लैक होल दूर की रोशनी को मोड़ देते हैं, जिससे पीछे की वस्तुएं विकृत या बहु-रूपी दिखाई देती हैं।
हमारी मिल्की वे के केंद्र में सैजिटेरियस ए* नामक सुपरमैसिव ब्लैक होल है, जो सूर्य से 40 लाख गुना भारी। करीब जाने पर स्पेगेटीफिकेशन होता है, जहां चीजें नूडल जैसी खिंच जाती हैं। सबसे बड़ा TON 618 सूर्य से 660 अरब गुना भारी, जबकि सबसे छोटा 3.8 गुना। ये तेजी से घूमते हैं, कुछ प्रति सेकंड 1000 चक्कर लगाते हैं।
ये न तो वर्महोल हैं, न वैक्यूम क्लीनर। बड़े तारों के सुपरनोवा विस्फोट से बनते हैं। इनके रहस्यों को सुलझाने के लिए वैज्ञानिक निरंतर प्रयासरत हैं, जो ब्रह्मांड की समझ को नई दिशा दे रहे हैं।