
तेल अवीव में पीएम नरेंद्र मोदी के आगमन को लेकर जबरदस्त उत्साह का माहौल है। भारत की राजनीति और विदेश नीति पर शोधरत विशेषज्ञ लॉरेन डागन अमोस का कहना है कि यहां गर्व, कृतज्ञता और खुशी की लहर दौड़ रही है।
मोदी जी की यात्रा भारत की आर्थिक उड़ान, डिजिटल क्रांति और मजबूत कूटनीति को रेखांकित कर रही है। लोग उन्हें देखने को बेताब हैं, क्योंकि वे हर विदेशी सफर पर प्रवासी भारतीयों से गहरा जुड़ाव बनाते हैं। यही परंपरा इस बार भी जोश भर रही है।
यह पहली भेंट नहीं, लेकिन वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इसका महत्त्व कई गुना है। यात्रा में आर्थिक साझेदारी, सांस्कृतिक मेलजोल और रक्षा समझौतों पर बातचीत संभावित है।
दोनों देशों के रिश्ते जनवरी 1992 में औपचारिक बने, मगर 2014 के बाद असल परिवर्तन आया। पहले ये सीमित और गोपनीय थे, अब खुले तौर पर रक्षा से लेकर अर्थव्यवस्था व संस्कृति तक फैले हैं।
सुरक्षा सहयोग में समान चुनौतियां हैं—भीतर-बाहर चरमपंथ। गाजा संघर्ष ने वायु रक्षा की अहमियत दिखाई। एक-दूसरे से सीखकर रिश्ते और गहरे होंगे।
मोदी का यह दूसरा दौरा ऐतिहासिक है। 2017 से पूर्व कोई कार्यरत पीएम नहीं आया। मुश्किल वैश्विक हालात में उनका आना मजबूत संदेश है। 7 अक्टूबर बाद भारत का समर्थन अटल रहा।
आर्थिक मोर्चे पर निवेश आधारभूत है। कृषि-जल प्रबंधन पुराने सहयोग क्षेत्र। 2002 में गुजरात सीएम के रूप में मोदी ने नेटाफिम जैसी कंपनियों का दौरा किया—ये सच्चे सहयोग की यादें हैं।
नए सौदों की चर्चा में ज्यादातर पहले ही साइन हो चुके। यात्रा भविष्य के द्वार खोलेगी। हाल के रक्षा एमओयू के फल उभर रहे। विकास क्षेत्रों में विस्तार जरूरी।