
चंडीगढ़ की अपनी शाखा में हुई कथित धोखाधड़ी की जांच के बीच आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने हरियाणा सरकार के विभागों को मूलधन और ब्याज समेत कुल 583 करोड़ रुपये का पूरा भुगतान कर दिया है। मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में बैंक ने इसकी पुष्टि की, जो ग्राहक विश्वास और पारदर्शिता के प्रति उसकी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रारंभिक जांच से पता चला कि शाखा के कुछ कर्मचारियों ने बाहरी लोगों के साथ साठगांठ कर नकली कागजात और भुगतान आदेश पास किए, जिससे राज्य के विभागों को आर्थिक नुकसान हुआ। बैंक ने स्पष्ट किया कि जांच संबंधित अधिकारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा जारी है, तथा जांच समाप्ति पर सभी दोषी पक्षों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जांच के दौरान भी बैंक ने सरकार के दावे के अनुरूप पूरी राशि का निपटान कर दिया। बयान में कहा गया कि अंतिम राशि में अन्य दावों के आधार पर संशोधन संभव है, किंतु वर्तमान में सभी दावे पूर्णतः निस्तारित हैं। हरियाणा सरकार ने बैंक की तत्परता, व्यावसायिकता और जिम्मेदारी की सराहना की। एक प्रवक्ता ने इसे वित्तीय संस्थानों के लिए अनुकरणीय बताया।
बैंक ने अपनी वित्तीय मजबूती पर जोर दिया। 31 दिसंबर 2025 तक स्थिति मजबूत है। सीआरआईएसआईएल ने फिक्स्ड डिपॉजिट को ट्रिपल ए रेटिंग दी, जबकि लॉन्ग टर्म के लिए डबल ए प्लस रेटिंग प्राप्त है। ग्राहक व्यवसाय 5,62,090 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो 22.6 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है। यह कदम न केवल विवाद सुलझाता है, बल्कि बैंक की विश्वसनीयता को नई ऊंचाई प्रदान करता है।