
नेपाल के संसदीय चुनाव नजदीक आते ही काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह ने बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के गढ़ झापा-5 में उनके खिलाफ ताल ठोक रहे शाह ने अपने चुनावी घोषणापत्र से चीन समर्थित महत्वाकांक्षी औद्योगिक पार्क को हटा दिया। यह नेपाल-चीन मित्रता औद्योगिक पार्क बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा है, जो भारत की संवेदनशील सीमा के करीब स्थित है।
5 मार्च को होने वाले इन चुनावों को अंतरिम सरकार करा रही है, जो पिछले साल सितंबर में जेन-जेड के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद ओली सरकार के पतन पर बनी। दमक इंडस्ट्रियल पार्क का यह नया नाम अब चर्चा में है, क्योंकि यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास है—भारत का चिकन नेक।
नई दिल्ली लंबे समय से ऐसी परियोजनाओं पर चिंतित रही है। अधिकारियों का सवाल है कि काठमांडू ने सीमा पर इतना बड़ा चीनी प्रोजेक्ट क्यों मंजूर किया? बीआरआई की कई परियोजनाएं देरी का शिकार हैं, और श्रीलंका जैसी वित्तीय मुश्किलें नेपाल में चिंता बढ़ा रही हैं।
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के 35 वर्षीय नेता बालेन शाह युवाओं के चहेते हैं। इंजीनियर से रैपर बने राजनेता को भविष्य का पीएम माना जा रहा है। उनके सहयोगी ने कहा कि विवादों के कारण परियोजना को घोषणापत्र से हटाया गया।
ओली ने अपने 41 बिंदुओं वाले वादे में पार्क पूरा करने का ऐलान किया, जो 2021 में उन्होंने ही शुरू किया था। यूएमएल प्रमुख के बीजिंग से करीबी संबंध जगजाहिर हैं। नेपाली कांग्रेस और यूएमएल के बीच ऋण मुद्दे पर मतभेद रहे, सीएसआईएफ रिपोर्ट में चीनी कर छूट की मांग को बाधा बताया गया।
भारत ने इसे रेडलाइन घोषित किया था, फिर भी ओली बोर्ड ने तेजी लाई। शाह का यह फैसला युवा विद्रोह को दर्शाता है, जो नेपाल की भू-राजनीति बदल सकता है।