
नई दिल्ली। झारखंड के चतरा में एयर एम्बुलेंस के दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना के बाद, जिसमें सातों सवारों की जान चली गई, डीजीसीए ने नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स (एनएसओपी) क्षेत्र में सुरक्षा मानकों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए मंगलवार को सख्त कदमों का ऐलान किया। महाराष्ट्र में हाल ही हुए लियरजेट हादसे ने भी इस फैसले को बल दिया है।
सभी एनएसओपी के साथ बैठक में डीजीसीए ने अनिवार्य प्रकटीकरण नीति की शुरुआत की। ऑपरेटरों को अपनी वेबसाइट पर विमान की आयु, रखरखाव इतिहास और पायलट अनुभव जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां अपलोड करनी होंगी। इससे चार्टर करने वाले ग्राहकों को विमान के गुणवत्ता का पूरा ब्योरा मिलेगा।
एक नई सुरक्षा रैंकिंग प्रणाली सभी एनएसओपी के लिए लागू होगी, जिसके मापदंड डीजीसीए की वेबसाइट पर सार्वजनिक किए जाएंगे। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर के रैंडम ऑडिट बढ़ाए जाएंगे और एडीएस-बी डेटा, ईंधन रिकॉर्ड व तकनीकी लॉगबुक की क्रॉस चेकिंग होगी।
डीजीसीए ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा उल्लंघन में सिर्फ पायलटों को दोषी न ठहराया जाए। मैनेजर और वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। एफडीटीएल उल्लंघन या असुरक्षित लैंडिंग की कोशिश पर पायलटों का लाइसेंस पांच साल के लिए निलंबित हो सकता है। गैर-अनुपालन पर जुर्माना और लाइसेंस रद्दीकरण की कार्रवाई होगी।
पुराने विमानों और स्वामित्व परिवर्तन वाले विमानों पर विशेष निगरानी रहेगी। अपनी एमआरओ सुविधा चलाने वाले एनएसओपी का ऑडिट होगा, जिसमें कमियां मिलने पर अनुमोदित संगठनों को काम सौंपना पड़ेगा।
मौसम संबंधी हादसों को मौसम की अनिश्चितता के बजाय गलत निर्णयों का परिणाम बताते हुए डीजीसीए ने रीयल-टाइम मौसम अपडेट सिस्टम लगाने, एसओपी का पालन और पायलट ट्रेनिंग में मौसम जागरूकता पर जोर देने के निर्देश दिए।
मार्च में एसओपी ऑडिट के पहले चरण के पूरा होने के बाद दूसरे चरण से शेष एनएसओपी कवर होंगे, जिससे चार्टर उड़ानों की सुरक्षा मजबूत होगी।