
बिहार में एचआईवी संक्रमण की चेन तेज रफ्तार पकड़ चुकी है। 13 जिले अब हाई रिस्क जोन बन चुके हैं, जिसमें राजधानी पटना सबसे ज्यादा प्रभावित है। विधान परिषद में मंगलवार को नौ सदस्यों ने ध्यानाकर्षण प्रस्तुत कर सरकार से प्रभावी रोकथाम व इलाज की योजना की मांग की।
सदस्यों ने बताया कि असुरक्षित संभोग और नशीले इंजेक्शन के साझा उपयोग से मामले बढ़ रहे हैं, खासकर युवाओं में। मुजफ्फरपुर दूसरे नंबर पर है। दिसंबर 2025 तक 97 हजार से अधिक मरीज 32 से ज्यादा एआरटी केंद्रों पर उपचार ले रहे हैं।
सरकार ने होली से पूर्व विशेष जांच शिविरों का ऐलान किया है। साथ ही एआईआईएमएस पटना, आईजीआईएमएस, एनएमसीएच सहित पांच नए एआरटी सेंटर खुलेंगे, कुल संख्या 34 से अधिक हो जाएगी। कुछ जिलों के आंकड़े पुराने हैं, जिनकी ताजा जानकारी जरूरी है।
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के 95:95:99 लक्ष्य की दिशा में राज्य प्रयासरत है। उच्च जोखिम समूहों में जांच, त्वरित उपचार और एआरटी उपलब्ध कराया जा रहा है। 186 एकीकृत परामर्श व जांच केंद्रों पर मुफ्त सुविधाएं हैं।
सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य शिविर, मोबाइल टीमें सक्रिय हैं। त्योहारों पर प्रवासी मजदूरों के लिए रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड व चिह्नित ग्रामों में कैंप लगते हैं। होली पर 24 फरवरी से 14 मार्च तक全省 में 300 शिविर आयोजित होंगे।
पटना में 8,270, गया में 5,760, मुजफ्फरपुर में 5,520, सीतामढ़ी में 5,026, बेगूसराय में 4,716, भागलपुर में 3,078 एड्स रोगी हैं। कुल 1.44 लाख लोग प्रभावित।
समाज कल्याण विभाग की बिहार शताब्दी योजना से संक्रमितों को 1500 रुपये मासिक व आश्रित बच्चों को 1000 रुपये मिल रहे हैं। 2025-26 में दिसंबर तक 63.81 करोड़ डीबीटी से हस्तांतरित।
इस महामारी से निपटने के लिए सतत प्रयास व जागरूकता अनिवार्य है।