
नई दिल्ली। विवादों में घिरी फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ अब सुप्रीम कोर्ट के रडार पर आ गई है। एक याचिका दायर कर फिल्म की रिलीज पर पूर्ण रोक और टाइटल में बदलाव की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस फिल्म का नाम और कंटेंट जातिगत वैमनस्य को बढ़ावा दे सकता है, जिससे सामाजिक सौहार्द को गहरा आघात लगेगा।
याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ‘यादव जी’ जैसे जाति संकेतक शब्द का इस्तेमाल जानबूझकर किया गया है। फिल्म यादव समाज को पुरानी और नकारात्मक छवि में पेश करती है, जो समाज में नफरत की आग भड़का सकती है। यह सामाजिक एकता के लिए खतरा है।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। बोर्ड ने प्रमाणपत्र देते हुए इस संवेदनशील मुद्दे को अनदेखा कर दिया। याचिका में मांग है कि बोर्ड को समुदायों की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए था।
देशभर से विरोध की खबरें आ रही हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में यादव संगठनों ने सड़कों पर उतरकर हंगामा किया। ज्ञापन सौंपे गए, जुलूस निकाले गए और फिल्म टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुईं। सोशल मीडिया पर ट्रेलर को लेकर भारी आलोचना हो रही है।
फिल्म की कहानी सिंपल यादव और वसीम अख्तर के अंतरधार्मिक प्रेम पर आधारित है, जिसमें परिवार, समाज और धर्म की बाधाएं प्रमुख हैं। लेकिन इसी थीम ने विवाद को जन्म दिया है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला फिल्म इंडस्ट्री के लिए मील का पत्थर साबित होगा।