
ब्रह्मांड के अथाह रहस्यों में डार्क एनर्जी सबसे ऊपर है। नासा के मुताबिक, यह अदृश्य ऊर्जा ब्रह्मांड का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा बनाती है और इसे तेजी से फैलाने का काम कर रही है। वैज्ञानिक वर्षों से इसकी पहचान उजागर करने में जुटे हैं, लेकिन अब तक यह अनसुलझा बना हुआ है।
13.8 अरब वर्ष पूर्व बिग बैंग से ब्रह्मांड का जन्म हुआ। एक अत्यंत सघन बिंदु से विस्फोट हुआ और सब कुछ फैलने लगा। जैसे गुब्बारा फुलता है, वैसे ही अंतरिक्ष बढ़ा। ठंडक आने पर परमाणु बने, फिर तारे, आकाशगंगाएं और ग्रह। शुरू में वैज्ञानिकों को लगा कि गुरुत्वाकर्षण इस फैलाव को धीमा कर देगा, शायद ब्रह्मांड सिकुड़ भी जाए।
लेकिन 1990 के अंत में टाइप आईए सुपरनोवा के अध्ययन ने सब बदल दिया। ये विस्फोट हमेशा एकसमान चमकते हैं, इसलिए दूरी मापने के लिए आदर्श। हबल दूरबीन ने पाया कि ये अपेक्षा से कम चमकीले दिख रहे, यानी उनकी आकाशगंगाएं ज्यादा दूर हैं। इसका मतलब ब्रह्मांड तेजी से फैल रहा है। इस धकेलने वाली ताकत को डार्क एनर्जी कहा गया।
डार्क एनर्जी गुरुत्वाकर्षण के विपरीत काम करती है। शुरुआती दौर में गुरुत्वाकर्षण हावी था, लेकिन फैलाव बढ़ने से इसका असर मजबूत हुआ। क्या यह कोई स्थिरांक है या कुछ और, यह जानने के लिए हबल और जेम्स वेब सक्रिय हैं।
इसकी खोज ब्रह्मांड के भविष्य को तय करेगी। क्या फैलाव अनंत चलेगा या रुकेगा? वैज्ञानिकों की दौड़ जारी है।