
जोधपुर। साध्वी प्रेम बाईसा की रहस्यमयी मृत्यु के मामले में कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित को गिरफ्तार करने के कुछ घंटों बाद ही जमानत पर रिहा कर दिया गया। यह घटना चिकित्सा लापरवाही के आरोपों के बीच पुलिस की त्वरित कार्रवाई को उजागर करती है।
28 जनवरी को बोरनाडा के आरती नगर आश्रम में साध्वी को सर्दी-खांसी और सांस फूलने की शिकायत थी। परिवार ने कंपाउंडर देवी सिंह को बुलाया, जिन्होंने दो इंजेक्शन दिए। स्थिति बिगड़ने पर प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
पिता वीरम नाथ ने शव आश्रम लाया। पुलिस ने महात्मा गांधी अस्पताल में 29 जनवरी को पोस्टमार्टम कराया। 30 जनवरी को बाड़मेर में अंतिम संस्कार हुआ। दो फरवरी को अंग नमूने एफएसएल भेजे गए, जिनकी रिपोर्ट 11 दिनों में आई।
एसआईटी ने पिता, स्टाफ, रसोइया, कंपाउंडर और अस्पताल कर्मियों से पूछताछ की। पुलिस आयुक्त ओम प्रकाश ने बताया कि फेफड़ों की गंभीर बीमारी से हृदय गति रुकना मुख्य कारण था, लेकिन कंपाउंडर ने प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया।
16 फरवरी को बोरनाडा थाने में लापरवाही का केस दर्ज। 19 फरवरी को गिरफ्तार, जमानत पर रिहा। डीसीपी विनीत बंसल ने पुष्टि की कि आरोप जमानती हैं। सिद्ध होने पर दो साल की सजा संभव।
जांच जारी है, अदालत और विशेषज्ञों की राय निर्णायक होगी। यह मामला अनियमित चिकित्सा प्रक्रियाओं पर सवाल उठाता है।