
भारतीय टेबल टेनिस की दुनिया में मौमा दास का नाम सम्मान और गौरव का प्रतीक है। 24 जनवरी 1984 को कोलकाता के नारकेलडांगा में जन्मीं मौमा को उनके पिता प्रबीर दास ने खेलों के प्रति अपनी रुचि के कारण छोटी उम्र से ही इस खेल से जोड़ा। संसाधनों की कमी के बावजूद कड़ी मेहनत से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत का परचम लहराया।
उनकी आक्रामक शैली, तेज प्रतिक्रिया और सटीक शॉट्स उन्हें एकल व युगल दोनों में खतरनाक बनाते हैं। 2000 में याकुत्स्क के चिल्ड्रन ऑफ एशिया गेम्स में पहला स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने धमाल मचा दिया। 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला टीम को रजत दिलाने में उनकी भूमिका सराहनीय रही।
विश्व चैंपियनशिप में 17 बार भागीदारी, मैनचेस्टर 1997 से डसेलडोर्फ 2017 तक, एशियाई रिकॉर्ड के बराबर। कॉमनवेल्थ में 2006 में टीम कांस्य, 2010 में टीम रजत व युगल कांस्य, 2018 में टीम स्वर्ण व युगल रजत। साउथ एशियन गेम्स में टीम, एकल व युगल स्वर्ण। 75 देशों के विरुद्ध 400 से अधिक मुकाबले।
2013 में अर्जुन पुरस्कार, 2021 में पद्मश्री से सम्मानित। ऑयल इंडिया लिमिटेड में कार्यरत मौमा युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं, जो दृढ़ संकल्प से लक्ष्य हासिल करने का जीता-जागता उदाहरण हैं।