
आज की व्यस्त जिंदगी में तनाव और भागमभाग आम हो गया है, लेकिन खुद से प्यार करने का सरल अभ्यास आपकी जिंदगी बदल सकता है। यह स्वार्थ नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान और देखभाल का प्रतीक है जो मन और शरीर दोनों को मजबूत बनाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, स्वयं की सराहना करना, सहायता लेना, विश्राम करना और खुद को प्राथमिकता देना आंतरिक शक्ति का स्रोत है।
स्वयं प्रेम का अर्थ है अपनी कमजोरियों, शक्तियों, गलतियों और सफलताओं को बिना शर्त स्वीकारना। आंतरिक आलोचना को रोकें, अपनी आवश्यकताओं को महत्व दें और खुद को उत्साहित करें। तुलना बंद करें, क्षमा सीखें और अपनी खुशियों को संजोएं।
इसके लाभ असंख्य हैं। मानसिक रूप से यह चिंता, तनाव को दूर कर शांति और कृतज्ञता लाता है। अध्ययन बताते हैं कि स्व-करुणा तनाव हार्मोन घटाती है, आत्मविश्वास बढ़ाती है और चुनौतियों से उबरने की क्षमता देती है।
रिश्तों में भी सुधार होता है—सीमाएं तय करना आसान हो जाता है। शारीरिक स्वास्थ्य में व्यायाम, पोषण, नींद जैसी आदतें पड़ती हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करती हैं और हृदय रोगों का जोखिम कम करती हैं।
जीवन सकारात्मक दिशा में मुड़ता है—लक्ष्य प्राप्ति आसान, उत्पादकता बढ़ती और संतुष्टि मिलती है। आज से स्वयं प्रेम अपनाएं और स्वस्थ जीवन जिएं।