
भारतीय कॉरपोरेट जगत में 2026 तक औसतन 9.1 प्रतिशत वेतन वृद्धि की उम्मीद है। ईवाई इंडिया की ‘फ्यूचर ऑफ पे’ रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) इस बढ़ोतरी में सबसे आगे रहेंगे, जहां 10.4 प्रतिशत तक सैलरी में इजाफा हो सकता है। डिजिटल और तकनीकी कौशलों की वैश्विक मांग इसके पीछे मुख्य कारण है।
वित्तीय सेवाओं में लगभग 10 प्रतिशत, ई-कॉमर्स में 9.9 प्रतिशत तथा लाइफ साइंसेज व फार्मा क्षेत्र में 9.7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। ये आंकड़े विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिभा निवेश की मजबूत रणनीति को दर्शाते हैं।
नौकरी छोड़ने की दर में कमी आ रही है। 2025 में यह 16.4 प्रतिशत रह गई, जो 2024 के 17.5 प्रतिशत से कम है। 80 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारी अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ रहे हैं, बेहतर मौके तलाशने के लिए।
वित्तीय सेवाओं में 24 प्रतिशत एट्रिशन सबसे ज्यादा रहा, जबकि प्रोफेशनल सर्विसेज और हाई-टेक आईटी में भी ऊंची दर दर्ज हुई। जीसीसी में यह मात्र 14.1 प्रतिशत रही, जो उनकी स्थिरता को दिखाता है।
ईवाई के अभिषेक सेन कहते हैं, ‘वेतन का भविष्य सिर्फ बढ़ोतरी के आकार पर नहीं, बल्कि सही कौशलों को पुरस्कृत करने और प्रतिस्पर्धा-स्थिरता के संतुलन पर निर्भर है।’ कंपनियां अब कौशल-आधारित सैलरी की ओर बढ़ रही हैं।
सर्वे में आधी कंपनियां पद-आधारित से कौशल-आधारित वेतन पर स्विच कर रही हैं। एआई, जेनरेटिव एआई, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी व क्लाउड विशेषज्ञों को 30-40 प्रतिशत ज्यादा सैलरी मिल सकती है।
वेरिएबल पे का हिस्सा 2025 में 16.1 प्रतिशत हो गया, पहले के 14.8 से अधिक। यह बदलाव कंपनियों को परिणाम-आधारित पुरस्कार देने में मदद कर रहा है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति को गति देगा।