
मुंबई। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला सामने आने के बाद सोमवार को बैंक के शेयरों में 20 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। शेयर लोअर सर्किट पर पहुंच गए। कथित रूप से बैंक कर्मचारियों द्वारा हरियाणा सरकार के खातों के साथ छेड़छाड़ की गई।
पिछले बंद भाव 83.51 रुपये के मुकाबले शेयर 10 प्रतिशत गिरकर 75.16 रुपये पर खुले। गिरावट बढ़ी और यह 66.80 रुपये तक लुढ़क गया। सुबह 11:38 बजे तक 15.71 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 70.39 रुपये पर कारोबार हो रहा था।
बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि चंडीगढ़ शाखा में कुछ कर्मचारियों ने हरियाणा सरकार के चुनिंदा खातों में अनधिकृत लेनदेन किए, जिसमें बाहरी लोग भी शामिल हो सकते हैं। चार अधिकारियों को निलंबित कर पुलिस और नियामकों को सूचना दी गई है।
ब्रोकरेज फर्मों के आकलन से यह घोटाला बैंक की कुल संपत्ति का 0.9 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026 के लाभ का 20 प्रतिशत है। इस घटना ने बैंकिंग क्षेत्र में सतर्कता की जरूरत पर जोर दिया है।
हरियाणा सरकार ने तत्काल प्रभाव से आईडीएफसी फर्स्ट और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी लेनदेन से प्रतिबंधित कर दिया। सभी विभागों को जमा, निवेश बंद करने, बाकी रकम ट्रांसफर करने और खाते बंद करने के निर्देश हैं।
वित्त विभाग ने सावधि जमा नियमों के उल्लंघन पर नाराजगी जताई, जहां सरकारी धनराशि बचत खातों में डाल कम ब्याज मिला। अब सख्त अनुपालन, मासिक मिलान और रिपोर्टिंग अनिवार्य है। सभी मिलान 31 मार्च 2026 तक पूरे होंगे और रिपोर्ट 4 अप्रैल तक जमा करनी होगी।
यह मामला बैंकिंग धोखाधड़ी के खतरों को उजागर करता है और सरकारी खातों की सुरक्षा पर सवाल उठाता है।