
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर हिंसा की आग में झुलस गया। सोमवार रात को एबीवीपी कार्यकर्ताओं और वामपंथी समर्थकों के बीच भयंकर झड़प हुई, जिसमें पत्थरबाजी और लाठियों से हमले के कारण 12-14 छात्र घायल हो गए। सभी को सफदरजंग अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया है।
जेएनयू मीडिया संयोजक विजय जायसवाल ने बताया कि रात साढ़े तीन बजे वामपंथी छात्रों का एक बड़ा समूह साबरमती टी-पॉइंट से कुलपति गेट की ओर मार्च कर रहा था। पिछले एक सप्ताह से चल रहे उनके विरोध प्रदर्शन का असल मकसद एबीवीपी पर हमला था। स्कूल एरिया में पहुंचकर उन्होंने नकाबपोश हमलावरों के साथ मिलकर डंडों से प्रहार शुरू कर दिए।
जायसवाल ने कहा कि लगभग 400 लोगों का यह झुंड मॉब लिंचिंग की तरह आगे बढ़ा। वीडियो फुटेज में कई चेहरे ऐसे दिखे जो जेएनयू के छात्र नहीं हैं। हमलावरों में ज्यादातर बाहरी तत्व थे, जिन्होंने रॉड और डंडों से छात्रों पर कहर बरपाया।
घायल एबीवीपी छात्र प्रतीक भारद्वाज ने अपनी डरावनी कहानी सुनाई। भगदड़ में वे किसी फ्लोर पर पहुंच गए और खुले बाथरूम में घुसकर दरवाजा बंद कर लिया। आधे घंटे बाद 150 लोगों का ग्रुप आ धमका। उन्होंने दरवाजा तोड़ने की कोशिश की, छेद करके फायर एक्सटिंग्विशर का धुआं और पाउडर भरा दिया। मेरे पास सबूत के रूप में फोटो हैं। बाद में सिक्योरिटी ने उन्हें बचाया।
एबीवीपी जेएनयू यूनिट के उपाध्यक्ष मनीष चौधरी ने बताया कि वामपंथी गुट ने बिना 48 घंटे के नोटिस के प्रदर्शन किया और वीसी आवास पर धरना देने का ऐलान किया। कैंपस में ताले लगाने लगे, छात्रों से दुर्व्यवहार किया। विवाद बढ़ा तो पत्थर चलने लगे।
यह घटना जेएनयू की पुरानी परंपरा को फिर उजागर करती है। बाहरी लोगों की घुसपैठ रोकने और सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत है, ताकि छात्रों का वैचारिक संघर्ष हिंसा न बने।