
स्वास्थ्य संबंधी चर्चाओं में कैल्शियम, आयरन या विटामिन डी की कमी तो अक्सर सुर्खियां बटोर लेती है, लेकिन विटामिन के जैसा महत्वपूर्ण तत्व कम ही चर्चा का विषय बनता है। यह विटामिन रक्त को जमाने, हड्डियों को मजबूत रखने और धमनियों को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब शरीर में इसकी मात्रा घट जाती है, तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं धीरे-धीरे उभरने लगती हैं।
विटामिन के एक वसा में घुलनशील यौगिक है जो शरीर के अंदर कई प्रोटीनों को सक्रिय करता है। ये प्रोटीन चोट लगने पर रक्तस्राव रोकने में सहायक होते हैं। कमी के लक्षणों में बिना वजह नाक से खून बहना, मसूड़ों से रिसाव या त्वचा पर आसानी से चोट के निशान दिखना शामिल है, जो रक्त जमाव की क्षमता में कमी दर्शाते हैं।
हड्डियों के लिए भी यह अनिवार्य है। ऑस्टियोकेल्सिन प्रोटीन को कैल्शियम से जोड़कर हड्डियों को घनत्व प्रदान करता है। इसकी कमी से कैल्शियम सही ढंग से अवशोषित नहीं होता, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ जाता है।
हृदय स्वास्थ्य पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। यह धमनियों में कैल्शियम के अनावश्यक जमाव को रोकता है, जो रक्त प्रवाह बाधित कर हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। कमी से धमनियां कठोर हो जाती हैं।
नवजोत शिशुओं में यह और भी критичल है। जन्म के समय उनके शरीर में स्टॉक न्यूनतम होता है और आंतों में उत्पादन करने वाले बैक्टीरिया अनुपस्थित रहते हैं। इससे हेमोरेजिक डिजीज का खतरा रहता है, जिसके बचाव के लिए जन्म के तुरंत बाद इंजेक्शन दिया जाता है।
पालक, ब्रोकोली, सोया जैसे खाद्य पदार्थों से इसे प्राप्त करें। नियमित जांच से इस खतरे को टाला जा सकता है।