
भारतीय सिनेमा जगत में पूरब कोहली का नाम मेहनत और संयोग की मिसाल है। 23 फरवरी 1979 को जन्मे इस कलाकार ने कभी अभिनेता बनने का ख्वाब नहीं देखा। न कोई स्क्रिप्टेड प्लान, न फिल्मी दुनिया की चाह। फिर भी उन्होंने अपनी पहचान गढ़ ली।
शुरुआत छोटे पर्दे से हुई। ‘हिप हिप हुर्रे’ धारावाहिक में एंट्री मात्र अनुभव के लिए की गई। दर्शकों की तारीफों ने रुचि जगा दी। धीरे-धीरे अभिनय उनका जुनून बन गया।
बॉलीवुड में 2003 की ‘बस यूं ही’ से कदम रखा, नंदिता दास संग। इसके बाद ‘सुपारी’, ‘वास्तु शास्त्र’, ’13वीं मंजिल’ जैसी फिल्मों ने विविधता दिखाई। ‘रॉक ऑन’ में केडी का रोल अविस्मरणीय रहा, जिसके लिए 2009 में फिल्मफेयर स्पेशल जूरी अवॉर्ड मिला।
निर्माण की ओर रुख किया ‘आई एम’ से, जहां अभिनय के साथ प्रोडक्शन में हाथ आजमाया। महेश भट्ट की ‘वो लम्हे’ और ‘आवारापन’ में विलेन बने, गहराई वाली अदाकारी से प्रभावित किया। ‘जल’ में जल संकट पर संवेदनशील भूमिका ने खूब वाहवाही बटोरी।
आज टीवी, फिल्में और वेब सीरीज में सक्रिय। ‘सेंस 8’ का राजन रसल ग्लोबल हिट, ‘इट्स नॉट डैट सिंपल’ और ‘आउट ऑफ लव’ में रोमांचक किरदार। रोमांटिक से खलनायक तक, पूरब ने हर रोल में जान फूंकी। उनकी कहानी प्रेरणा है कि मेहनत से कुछ भी संभव।