
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 7 और 8 मार्च को ‘नारी से नारायणी’ पर एक भव्य राष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है। राष्ट्र सेविका समिति, विद्वत परिषद और अपन सरण्य न्यास दिल्ली के संयोजन में आयोजित यह कार्यक्रम महिलाओं की आंतरिक शक्ति को जागृत करने पर केंद्रित है।
राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख डॉ. शरद रेणु ने बताया कि पूरे देश में प्री-इवेंट संगोष्ठियों ने शोधार्थी छात्राओं, प्रोफेसरों, विद्वानों और विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं को जोड़ा है। शक्ति, भक्ति, चेतना और प्रेरणा जैसे आठ विषयों पर गहन चर्चाएं और शोध पत्रों का वाचन हुआ।
यह अवधारणा भारतीय दर्शन पर आधारित है, जो व्यक्ति से परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व कल्याण तक की प्रगति का मार्ग दिखाती है। प्रतिभागी महिलाएं अपने क्षेत्रों में सक्रिय हैं और राष्ट्र सेवा के लिए कटिबद्ध। सम्मेलन के निष्कर्ष भारत सरकार को सौंपे जाएंगे।
अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका सुनीता हलदेकर ने इसे अभियान बताया। परिवार की रीढ़ महिला है, जो सांस्कृतिक धरोहर संभालती है। उद्देश्य महिलाओं को विकास की सकारात्मक दिशा देना है।
डॉ. रूपा रावल ने कहा, महिलाओं में अपार ऊर्जा है, जिसे राष्ट्रहित में जगाना जरूरी। यह विकसित भारत के लिए सामूहिक संकल्प है।
अलका इनामदार बोलीं, हर नारी में नारायणी है, उसे पहचानें। सनातन में नर-नारी पूरक हैं। सुनीला सोवनी ने कहा, यह परिषद आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करेगी।