
तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में रविवार को उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 18वीं सदी की वीरांगना रानी वेलु नचियार की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। वीरमंगई स्थित इस स्मारक पर उन्होंने कहा कि रानी नचियार का जीवन और संघर्ष विकसित भारत के निर्माण में प्रेरणा बनेगा। उन्होंने रानी के वंशजों से भी मुलाकात की और उनकी विरासत पर चर्चा की।
रानी वेलु नचियार शिवगंगा की शासिका थीं, जिन्हें अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध लड़ने वाली पहली भारतीय रानी माना जाता है। उनके साहस ने स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखी। एक अन्य आयोजन में उपराष्ट्रपति ने शिवगंगा पैलेस में राजा मुथु विजया रघुनाथ सशिवर्णा को श्रद्धा दी।
उन्होंने तिरुकोष्टियूर के सौम्यनारायण पेरुमल मंदिर में जाकर सभी की शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर उन्होंने तमिल व गुजराती में संविधान के अद्यतन संस्करण जारी किए थे। तमिल को प्राचीन शास्त्रीय भाषा और गुजराती को सांस्कृतिक धरोहर बताया।
इससे संविधान जन-जन तक पहुंचेगा, लोकतंत्र मजबूत होगा। विधि मंत्रालय की सराहना करते हुए उन्होंने भारत की भाषाई विविधता पर जोर दिया। तमिल से कश्मीरी, गुजराती से असमिया तक हर भाषा सदियों की विरासत है। संविधान बहुभाषावाद को शक्ति मानता है, जो विश्व में अनुपम है।