
नई दिल्ली में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में क्रांति की बड़ी उम्मीदें जगी हैं। संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) को सीएनजी में मिलाने पर प्रस्तावित एक्साइज ड्यूटी छूट से करीब 1 लाख करोड़ रुपये तक निवेश आ सकता है। इंडियन बायोगैस एसोसिएशन (आईबीए) ने रविवार को इसकी जानकारी दी।
केंद्रीय बजट 2026 में घोषित यह कदम 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। आईबीए के मुताबिक, सीएनजी में सीबीजी मिश्रण पर छूट से परियोजनाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी और निजी निवेशकों का रुझान बढ़ेगा।
अगले पांच साल में सिटी गैस नेटवर्क में महज 5 प्रतिशत मिश्रण भी 2.5-3 मिलियन मीट्रिक टन सीबीजी की जरूरत पैदा करेगा। इससे 45,000-55,000 करोड़ का निवेश संभव है।
स्थिर नीति और मूल्य व्यवस्था से 2032 तक मिश्रण 7-8 प्रतिशत पहुंच सकता है, निवेश दोगुना होकर 1 लाख करोड़ तक होगा। यह छूट नवीकरणीय सीबीजी पर पुरानी कर असमानता दूर करती है।
गैस कंपनियों को लागत घटेगी, उपभोक्ताओं को सस्ती दरें मिलेंगी, उत्पादकों को निश्चित बाजार। भारत में 60 मिलियन टन क्षमता वाले जैविक कचरे से ग्रामीण विकास को बल मिलेगा।
छोटे संयंत्रों की रिटर्न दर सुधरेगी, पहले अटकी परियोजनाएं गति पकड़ेंगी। सीबीजी जीवनचक्र में 70-90 प्रतिशत उत्सर्जन घटाता है। 10 प्रतिशत मिश्रण से सालाना 12-15 मिलियन टन सीओ2 बचेगा।
यह बदलाव ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर पर्यावरण लक्ष्यों को गति देगा।