
तेलंगाना पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान में रविवार को जबरदस्त सफलता हासिल हुई। शीर्ष माओवादी सरगना थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी ने 16 साथियों के साथ आदिलाबाद जिले के आसिफाबाद जंगलों में हथियार डाल दिए। प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के महासचिव देवजी का यह आत्मसमर्पण संगठन के लिए अभूतपूर्व क्षति साबित हो रहा है।
पेद्दापल्ली जिले के निवासी देवजी पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का प्रमुख सदस्य था और पिछले साल मई में छत्तीसगढ़ मुठभेड़ में मारे गए बसवराजू की हत्या के बाद संगठन का नेतृत्व संभाल रहा था। देशभर में फैले 17 तेलंगाना मूल के माओवादी नेताओं में वह महत्वपूर्ण स्थान रखता था।
पिछले माह डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी ने देवजी से सीधे अपील की थी। उन्होंने सरकारी पुनर्वास योजनाओं का भरोसा दिलाया और ‘अब संघर्ष मत करो, अपने गांव से प्यार करो’ नारे के साथ मुख्यधारा में लौटने का आह्वान किया। इस प्रयास ने रंग दिखाया।
सूत्रों के अनुसार, समूह ने पुलिस के समक्ष हथियार जमा कर दिए। आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन सोमवार को मीडिया के सामने पेश करने की तैयारी चल रही है। वर्ष 2025 में तेलंगाना में कुल 576 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।
नवंबर में देवजी की सुरक्षा इकाई के सदस्य आंध्र प्रदेश के जिलों से गिरफ्तार हुए थे। यह उन मुठभेड़ों के बाद था जिनमें माडवी हिडमा, उसकी पत्नी और टेक शंकर जैसे कमांडर ढेर हो गए। यह घटनाक्रम माओवादियों पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है।
सरेंडर करने वालों के लिए पुनर्वास में व्यावसायिक प्रशिक्षण, आवास और आर्थिक सहायता सुनिश्चित होगी। यह कदम नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना की दिशा में मील का पत्थर है। सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि इससे और सरेंडर को प्रोत्साहन मिलेगा।