
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का समापन हुआ, लेकिन यह किसी अंत का प्रतीक नहीं, बल्कि नई शुरुआत का संकेत है। इस समिट ने स्पष्ट संदेश दिया कि विश्व ने भारत को केवल बाजार ही नहीं, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य को गढ़ने वाला मजबूत साझेदार भी पाया है।
सप्ताह भर चले इस आयोजन का मुख्य आकर्षण इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो था, जो 70,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला दस महत्वपूर्ण क्षेत्रों को समर्पित था। वैश्विक नेता, तकनीकी विशेषज्ञ, शोधकर्ता और छात्र विशाल हॉलों में भटकते हुए प्रदर्शनियों का अवलोकन कर रहे थे और गहन संवाद कर रहे थे।
समिट का मूल मंत्र था—सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय। उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की एआई क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने देश की विविधता, जनसांख्यिकीय शक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों को स्थायी ताकत बताया।
मोदी ने कहा कि भारत में सफल एआई मॉडल विश्व स्तर पर लागू हो सकते हैं। ‘भारत में बनाएं, दुनिया को दें’—यह उनका आह्वान था।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने भारत की डिजिटल उपलब्धियों की सराहना की—14 अरब डिजिटल पहचान, प्रतिमाह 20 अरब लेनदेन वाली भुगतान प्रणाली और 5 करोड़ डिजिटल स्वास्थ्य आईडी। उन्होंने इसे ‘इंडिया स्टैक’ करार दिया—खुला, परस्पर संचालनीय और संप्रभु।
प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग का माहौल बना रहा। बहुपक्षीय संस्थाओं और नेताओं की मौजूदगी ने इसे व्यापार मेला से ऊपर उठा दिया। यह एआई शासन का निर्णायक मंच बन गया।
भारत ने मेजबान के रूप में अपनी डिजिटल बुनियादी ढांचे पर आत्मविश्वास दिखाया। संसाधन साझा करने और सीखने को तैयार राष्ट्र के रूप में उभरा, जहां संप्रभुता वैश्विक जिम्मेदारी से जुड़ गई।