
नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट ने वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण घोषणा की पेशकश की। भारत और अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नई साझेदारी की शुरुआत की है, जो निजी क्षेत्र के नवाचार पर आधारित है। अमेरिका-भारत एआई अपॉर्चुनिटी पार्टनरशिप के तहत दोनों देश नियामकीय ढांचे को समरूप बनाने, सेमीकंडक्टर व ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त करने और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने पर सहमत हुए हैं।
यह समझौता पैक्ट फॉर सिलिकॉन डिक्लेरेशन का द्विपक्षीय विस्तार है, जिसका लक्ष्य तकनीकी क्रांति को निर्देशित करना है। दोनों राष्ट्रों की सरकारें अपने नवाचार तंत्रों के लिए साझा दृष्टिकोण अपनाते हुए इसे व्यापक सामरिक साझेदारी से जोड़ रही हैं। एआई का भविष्य विश्वसनीय सहयोग, आर्थिक सुरक्षा और स्वतंत्र उद्यम पर टिका होना चाहिए।
ट्रंप-मोदी की ट्रस्ट पहल को दोहराते हुए, बयान में कहा गया कि एआई के अवसरों को अपनाकर नवाचार को मानव कल्याण के लिए निर्देशित किया जाएगा। नेतृत्व में विफलता ही आजाद दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है। दोनों पक्ष नवाचार-अनुकूल नियमों को अपनाने का वचन देते हैं, जो स्टार्टअप्स और प्लेटफॉर्म्स को तेजी से विकास करने में सक्षम बनाएंगे।
भौतिक एआई ढांचे को मजबूत करने पर जोर देते हुए, पैक्ट फॉर सिलिकॉन के तहत संयुक्त शोध परियोजनाएं शुरू होंगी। ऊर्जा बुनियादी ढांचा विस्तार, महत्वपूर्ण खनिज उत्पादन, कुशल श्रमिकों का उपयोग और सेमीकंडक्टर प्रणाली विकास प्रमुख लक्ष्य हैं।
निजी उद्यम को बढ़ावा देने के लिए वेंचर कैपिटल प्रवाह आसान होगा, आरएंडडी साझेदारी गहरी होगी, डेटा सेंटरों में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। एआई कम्प्यूटिंग क्षमता, प्रोसेसर उपलब्धता और मॉडल नवाचार पर सहयोग बढ़ेगा।
दुनिया के सबसे पुराने और बड़े लोकतंत्र अब समृद्धि व सद्भाव के लिए एकजुट हो रहे हैं। यह साझेदारी एआई भविष्य को नागरिक-केंद्रित बनाएगी, अर्थव्यवस्था मजबूत करेगी और स्वतंत्रता, खुलापन जैसे मूल्यों को मजबूत करेगी। वैश्विक बहस के बीच यह एक नया अध्याय है।