
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शारीरिक मेहनत कम हो गई है, लेकिन वजन घटाने के चक्कर में लोग ‘जीरो-फैट’ का ट्रेंड अपना रहे हैं। तेल-घी को पूरी तरह नकार दिया जा रहा है और बाजार में लो-फैट प्रोडक्ट्स की भरमार है। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह सोच शरीर को कमजोर बना रही है।
वसा सिर्फ कैलोरी नहीं, बल्कि कोशिकाओं का निर्माण और मस्तिष्क की सेहत का आधार है। अच्छी वसा जैसे देशी घी, कच्ची घानी सरसों का तेल, नारियल तेल, तिल का तेल, अखरोट, बादाम, अलसी के बीज, एवोकाडो और ऑलिव ऑयल को सीमित मात्रा में लें। समोसे-पिज्जा जैसे प्रोसेस्ड फूड से दूर रहें।
विटामिन ए, डी, ई, के वसा में घुलनशील हैं। बिना वसा के ये ठीक से अवशोषित नहीं होते, जिससे इम्यूनिटी कमजोर पड़ती है। ओमेगा-3 फैटी एसिड मस्तिष्क की नसों को जोड़ते हैं, कमी से अल्जाइमर, डिप्रेशन का खतरा बढ़ता है।
हार्मोन टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन के लिए भी वसा जरूरी। महिलाओं में इसकी कमी से माहवारी और प्रजनन समस्याएं हो सकती हैं। निष्कर्षतः संतुलित वसा आहार में शामिल करें, सेहतमंद रहें।