
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर है और नॉर्थ 24 परगना की संदेशखाली सीट चर्चा का केंद्र बनी हुई है। सुंदरबन डेल्टा के इस एसटी आरक्षित क्षेत्र ने अपने जटिल इतिहास और हालिया घटनाओं से सबका ध्यान खींचा है।
रायमंगल-विद्याधरी नदियों से घिरा यह इलाका मछली पालन और खेती पर निर्भर है। बाढ़, खारे पानी की समस्या ने हमेशा चुनौतियां खड़ी की हैं। संदेशखाली-I और II ब्लॉकों की सात ग्राम पंचायतों वाला यह पूरी तरह ग्रामीण क्षेत्र है, जहां ढाई लाख मतदाता हैं। अनुसूचित जाति सबसे बड़ा वोट बैंक है, उसके बाद एसटी और मुस्लिम।
राजनीतिक सफर में माकपा का लंबा राज रहा—1977 से 2011 तक आठ लगातार जीत। 2016 में तृणमूल के सुकुमार महाता ने मोर्चा तोड़ा और 2021 में दोबारा जीते। भाजपा ने 2021 में दूसरा स्थान हासिल किया और लोकसभा में यहां बढ़त बनाई।
जनवरी 2024 की हिंसा ने समीकरण उलट दिया। ईडी छापों के दौरान भ्रष्टाचार, भूमि हड़पने और महिलाओं पर अत्याचार के आरोप सामने आए। स्थानीय तृणमूल नेताओं पर गंभीर इल्जाम लगे, जिससे इलाके में आक्रोश फैल गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि भाजपा को इस नाराजगी का फायदा मिलेगा, खासकर एससी-एसटी वोटों से। तृणमूल की छवि को झटका लगा है। वाम-कांग्रेस गठबंधन कमजोर है लेकिन असर डाल सकता है। संदेशखाली अब सिर्फ सीट नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति का आईना है।