
हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अन्नू कपूर का सफर बेहद प्रेरणादायक है। भोपाल में 20 फरवरी 1956 को जन्मे अनिल कपूर, यानी अन्नू, एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते हैं जहां कला का बोलबाला था। पिता मदनलाल पारसी थिएटर चलाते थे, मां उर्दू की अध्यापिका। लेकिन आर्थिक तंगी ने बचपन कठिन बना दिया, पढ़ाई बीच में छूट गई।
युवावस्था में रंगमंच की ओर रुख किया और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में प्रवेश लिया। यहीं 22 साल की उम्र में एक नाटक में 70 वर्षीय बुजुर्ग का किरदार निभाया, जिसने दर्शकों को चौंका दिया। श्याम बेनेगल प्रभावित होकर उन्हें ‘मंडी’ में ले लिया। इस तरह फिल्मी करियर की नींव पड़ी।
‘उत्सव’ से धाकड़ एंट्री, फिर ‘मिस्टर इंडिया’, ‘तेजाब’, ‘राम लखन’ में अमिट छाप। कॉमेडी टाइमिंग और संवाद अदायगी ने उन्हें स्टार बनाया। 2012 की ‘विक्की डोनर’ में डॉक्टर बलदेव चड्ढा का रोल राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया। टीवी पर ‘अंताक्षरी’ और रेडियो ने नई ऊंचाइयां दीं। आज भी सक्रिय, चार दशक का करियर मिसाल है।