
नई दिल्ली। सन नियो पर दिख रहे धारावाहिक ‘प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी’ में राजस्थान की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर पुरानी रस्मों और नई सोच के द्वंद्व को बखूबी दिखाया गया है। श्रेया जैन द्वारा निभाए जा रहे वैष्णवी किरदार ने दर्शकों का दिल जीत लिया है। यह भूमिका महिलाओं पर थोपे गए खोखले परंपराओं पर सवाल खड़े करती है।
श्रेया ने बताया, ‘वैष्णवी परंपराओं का आदर करती है, मगर बिना सोचे-समझे उन्हें नहीं निभाती। वह आधुनिक विचारों वाली लड़की है, जो हर बात पर सवाल उठाती है, समझने की कोशिश करती है और रिश्तों में समानता चाहती है। यह किरदार समाज की उन मान्यताओं को चुनौती देता है, जो आज भी औरतों को बेड़ियों में जकड़े रखती हैं।’
उनके अनुसार, वैष्णवी की सबसे बड़ी पूंजी उसकी प्रगतिशील सोच है। रिश्तों में खुलापन, बराबरी का हक और यह विश्वास कि प्रेम या विवाह में एक पक्ष का ही वर्चस्व नहीं चलना चाहिए।
शो से भावनात्मक लगाव के बारे में श्रेया बोलीं, ‘जयपुर मेरी कर्मभूमि है। राजस्थान की संस्कृति मुझे बचपन से घेरे हुए है। वैष्णवी का किरदार मेरे लिए स्वाभाविक है, जैसे खुद का हिस्सा हो।’
करियर पर बात करते हुए कहा कि मुंबई आने का निर्णय सहज था, परिवार का साथ मिला। शुरुआत में ऑडिशन, रिजेक्शन झेले। ‘उड़ारिया’ में मुख्य भूमिका ने करियर बदला। अब ‘बींदणी’ से पहचान मजबूत हो रही है।
अभिनय में आत्मविश्वास समय के साथ आता है, हल्की बेचैनी हमेशा रहती है जो बेहतरी प्रेरित करती है। खुद को मेहनती, संवेदनशील, दयालु बताया।
फिटनेस का राज संतुलित भोजन, वॉक, योग। रुचि स्पेस और खगोलशास्त्र में। प्रेरणा गहन अभिनेताओं से मिलती है।