
असम के तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ जिलों के दौरे पर पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने चाय बागान मजदूरों को राज्य की विश्वव्यापी ख्याति का पूरा श्रेय दिया। गुरुवार को अपने इस भ्रमण के दौरान उन्होंने असम की आध्यात्मिक समृद्धि, सांस्कृतिक एकजुटता और चाय उद्योग के श्रमिकों के योगदान पर विस्तार से चर्चा की।
सोशल मीडिया एक्स पर दौरे की झलकियां साझा करते हुए नवीन ने तिनसुकिया के बारेकुरी गांव के पवित्र नामघर का जिक्र किया। उन्होंने इसे मोरन समुदाय की गहन भक्ति और सांस्कृतिक सामंजस्य का प्रतीक बताया। गांव को प्रकृति के साथ तालमेल भरा जीवन का नमूना करार देते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ में उल्लिखित दुर्लभ हूलॉक गिबन्स का उल्लेख किया, जिन्हें स्थानीय ‘होलो बंदर’ कहते हैं और जो ग्रामीणों के साथ शांतिपूर्वक रहते हैं।
नवीन ने कहा कि यह गांव आस्था, संस्कृति और प्रकृति के सह-अस्तित्व का जीवंत उदाहरण है। नामघर में उन्होंने शांति, समृद्धि और राष्ट्र की उन्नति की प्रार्थना की।
इसके बाद डिब्रूगढ़ के लखीनगर में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के आवास पर पारंपरिक असमिया नाश्ता ग्रहण किया। इस मौके पर उन्हें असम की आतिथ्यपूर्ण परंपराओं और स्वादिष्ट भोजन का अनुभव हुआ।
असम चाय उद्योग की वैश्विक प्रसिद्धि पर बोलते हुए नवीन ने कहा कि हरी-भरी चाय बागानों और अद्वितीय स्वाद वाली चाय ने राज्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। लेकिन यह सब चाय मजदूरों की कठोर परिश्रम, निष्ठा और अनुशासन का फल है। उन्होंने कहा, ‘इन श्रमिकों का योगदान असम की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करता है।’
दौरे ने असम की सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और आर्थिक शक्तियों को संरक्षित रखने तथा परंपरा व सतत विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया।