
नई दिल्ली में नौसेना के प्रमुख बहुराष्ट्रीय अभ्यास ‘मिलन’ के 13वें संस्करण का आगाज हुआ, जिसे नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने ‘समुद्री महाकुंभ’ करार दिया। 74 देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समुद्र की सुरक्षा ही वैश्विक शांति की कुंजी है। सभी देशों को एकजुट होकर इन चुनौतियों का सामना करना होगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी ने इस आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। एडमिरल त्रिपाठी ने जोर देकर कहा कि समुद्री डकैती, तस्करी, आतंकवाद और प्राकृतिक आपदाएं किसी एक देश की समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक खतरे हैं। इनसे निपटने के लिए संयुक्त रणनीति अनिवार्य है।
प्रधानमंत्री की सागर परिकल्पना का हवाला देते हुए उन्होंने समान आधार पर साझेदारी की वकालत की। भारतीय नौसेना वैश्विक, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय स्तर पर सहयोग बढ़ा रही है। हिंद महासागर में संयुक्त तैनाती, अफ्रीकी देशों के साथ नए अभ्यास और पड़ोसियों को संकटकालीन सहायता इसी दिशा में कदम हैं।
1995 में शुरू हुए मिलन अभ्यास ने अब भरोसे का प्रतीक बन लिया है। इस बार 74 देशों की भागीदारी इसे अब तक का सबसे विशाल आयोजन बना रही है। आगामी दिनों में नौसेनाएं जटिल समुद्री युद्धाभ्यास, रणनीतिक वार्ताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेंगी।
भारत की एकजुट करने की परंपरा के अनुरूप यह मंच समुद्र को सुरक्षित और खुला रखने के साझा संकल्प को मजबूत करेगा। एडमिरल ने आईओएस सागर 2.0 और अफ्रीका-भारत अभ्यासों का उल्लेख कर दृढ़ इरादे की ताकत बताई। मिलन 2026 समुद्री सुरक्षा में मील का पत्थर साबित होगा।