
भारत के मानव अंतरिक्ष अभियान गगनयान को एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। डीआरडीओ ने चंडीगढ़ की टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी में रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज पर ड्रोग पैराशूट का क्वालिफिकेशन लेवल लोड टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया।
यह पैराशूट कैप्सूल की सुरक्षित वापसी का पहला कदम है। यह सबसे पहले खुलता है, जिससे कैप्सूल की रफ्तार धीमी होती है और स्थिरता आती है। तब मुख्य पैराशूट खुलने का रास्ता साफ हो जाता है। परीक्षण में इसे वास्तविक उड़ान से कहीं अधिक भार सहन कराया गया, जो इसकी मजबूती का प्रमाण है।
गगनयान में तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर ऊंचाई पर तीन दिनों तक भेजा जाएगा। इस सफलता से भारत ने स्वदेशी उच्च क्षमता वाले पैराशूट डिजाइन में अपनी महारत साबित की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों को बधाई दी, इसे आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बताया। डीआरडीओ चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत ने भी टीम की सराहना की। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिशन की तैयारियों को और सशक्त बनाएगा।
इसरो के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर और अन्य संस्थानों के सहयोग से यह परीक्षण हुआ, जो भारत की अंतरिक्ष क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।