
वॉशिंगटन। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के पूर्व अधिकारी आत्मान त्रिवेदी ने भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे को सकारात्मक कदम करार दिया है। डीजीए-अलब्राइट स्टोनब्रिज ग्रुप के पार्टनर त्रिवेदी का मानना है कि यह अंतरिम समझौता दोनों देशों के निर्यात को बढ़ावा देगा, सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और रणनीतिक साझेदारी को नई गति प्रदान करेगा।
अमेरिकी-भारतीय रणनीतिक एवं व्यावसायिक संवाद गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले त्रिवेदी ने कहा कि यह समझौता दोनों पक्षों के कारोबारों के लिए नई संभावनाएं खोलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘यह सकारात्मक प्रगति है। व्यापार समझौते से दोनों देशों के निर्यात में भारी लाभ होगा, खासकर छोटे-मध्यम उद्यमों को।’
यह ढांचा अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं को भारत में और भारतीय क्षेत्रों को अमेरिका में प्रवेश देता है। भारत के लिए यह ‘मेक इन इंडिया’ और विनिर्माण लक्ष्यों को साकार करने का सुनहरा अवसर है। त्रिवेदी ने कहा कि अमेरिका में अधिक भारतीय उत्पाद दिखेंगे, जो पहले से भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। इससे वैश्विक स्तर पर मेक इन इंडिया को बल मिलेगा।
अमेरिका को भारत के उच्च टैरिफों से राहत मिलेगी, जिससे उसके कारोबारियों के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजार में बिक्री आसान होगी। भारत के नजरिए से वस्त्र, रत्न-आभूषण और चमड़ा क्षेत्रों को अधिक पहुंच मिलेगी। भारत ने चतुराई से कुछ औद्योगिक वस्तुओं पर शून्य टैरिफ सुनिश्चित किया, जबकि अमेरिका 50% से घटाकर 18% पर सहमत हुआ।
वियतनाम, मलaysia जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भारत को बड़ा लाभ। बाजार खुलने से वैश्विक सप्लाई चेन में गहरा एकीकरण होगा, शत्रुतापूर्ण देशों पर निर्भरता घटीगी। 500 अरब डॉलर की खरीद प्रतिबद्धता में रक्षा-ऊर्जा प्रमुख। ‘इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण समान होने से भारत अधिक रक्षा और ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा।’
हालांकि 2024 के 87 अरब डॉलर आयात से 500 अरब तक पहुंच चुनौतीपूर्ण। गैर-टैरिफ बाधाएं जैसे लाइसेंसिंग, मानक और स्थानीयकरण चिंता बने हैं। एच-1बी वीजा पर राजनीतिक संवेदनशीलता बनी हुई। यह ढांचा दोनों देशों के लिए आर्थिक मजबूती का आधार बनेगा।